विदेश

यूरोप के 6 देशों में सड़कों पर उतरे युवा! आखिर क्यों भड़का जनता का गुस्सा, सरकारों के सामने बढ़ी चुनौती?

फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था से नाराजगी, स्पेन-पुर्तगाल में महंगे मकानों का संकट और इटली-अल्बानिया में आर्थिक परेशानियां बनीं विरोध की वजह; क्या चुनावों पर भी पड़ेगा असर?

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

European Youth Protests: यूरोप को बेहतर जीवन स्तर और मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए जाना जाता है, लेकिन अब यहां के कई देशों में युवा और आम नागरिक बुनियादी जरूरतों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। फ्रांस, स्पेन, पुर्तगाल, इटली, बेल्जियम और अल्बानिया में अलग-अलग मुद्दों पर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। कहीं शिक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में है, तो कहीं आसमान छूते किराये, महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इन प्रदर्शनों के केंद्र में एक बड़ा सवाल है क्या आर्थिक विकास के बावजूद आम लोगों के लिए सम्मानजनक जीवन जीना मुश्किल होता जा रहा है?

फ्रांस: शिक्षा और महंगाई से नाराज युवा

फ्रांस में विद्यार्थियों ने शिक्षकों की कमी, स्कूलों की जर्जर इमारतों और विश्वविद्यालयों में दाखिले की जटिल प्रक्रिया के खिलाफ आवाज उठाई। ले मोंडे की 16 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी स्कूलों में एक कक्षा में औसतन 30.5 विद्यार्थी हैं। शिक्षा के कई घंटे शिक्षकों की अनुपलब्धता और अन्य कारणों से प्रभावित होते हैं। धीरे-धीरे इस असंतोष में मजदूर संगठन और महंगाई से परेशान लोग भी शामिल हो गए। प्रदर्शनकारियों ने बेहतर वेतन, पेंशन में बढ़ोतरी और कीमतें कम करने की मांग की। सरकार ने अतिरिक्त अस्थायी शिक्षकों की व्यवस्था करने और विश्वविद्यालय फीस बढ़ाने की योजना वापस लेने का आश्वासन दिया है।

स्पेन: महंगे किराये ने बढ़ाया संकट

स्पेन में आवास संकट विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख मुद्दा बन गया है। किराये में भारी बढ़ोतरी और बेदखली की घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ाई है। एक 87 वर्षीय महिला से जुड़ा मामला भी चर्चा में आया, जिसे किराया बढ़ने के बाद घर खाली करना पड़ा था। प्रदर्शनकारी किराये पर नियंत्रण, बेदखली रोकने और निवेश फंडों की ओर से आवासीय संपत्तियां खरीदने पर सख्त नियम बनाने की मांग कर रहे हैं।

पुर्तगाल: कमाई से ज्यादा मकान का खर्च

पुर्तगाल में घर खरीदना और किराये पर रहना लगातार महंगा हुआ है। यूरोपीय संसद के आंकड़ों के मुताबिक, 2015 से 2024 के बीच यहां घरों की कीमतें 124.4 प्रतिशत बढ़ीं। लिस्बन में किराये का खर्च औसत वेतन से भी अधिक होने का अनुमान है। ऐसे में युवाओं और मध्यम आय वाले परिवारों के लिए आर्थिक संतुलन बनाए रखना चुनौती बन गया है।

इटली, बेल्जियम और अल्बानिया में भी असंतोष

इटली में बढ़ती जीवनयापन लागत के खिलाफ प्रदर्शन हुए। बेल्जियम में शिक्षा सुधारों, फीस और सरकारी बजट कटौती को लेकर विरोध देखने को मिला। वहीं, अल्बानिया में भ्रष्टाचार, रोजगार की कमी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं ने लोगों की नाराजगी बढ़ाई है। इन देशों में मुद्दे अलग-अलग हैं, लेकिन बेहतर सार्वजनिक सुविधाओं और जवाबदेह सरकार की मांग समान रूप से सामने आ रही है।

क्या चुनावों में दिखेगा जनता के गुस्से का असर?

इन प्रदर्शनों का असर आगामी चुनावी बहसों पर पड़ सकता है। स्पेन में आवास संकट, फ्रांस में शिक्षा और महंगाई तथा इटली में जीवनयापन की लागत जैसे मुद्दे राजनीतिक चर्चा को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, इन आंदोलनों से चुनावी नतीजों पर क्या असर पड़ेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। यूरोपीय संघ में 2015 से 2024 के बीच घरों की कीमतें औसतन 53 प्रतिशत बढ़ीं। यूरोपीय निवेश बैंक ने 2025 में आवास की जरूरतों को पूरा करने के लिए 22.5 लाख अतिरिक्त घरों की आवश्यकता का अनुमान भी जताया था।

सरकारों के सामने सबसे बड़ा सवाल

छह देशों में हो रहे विरोध-प्रदर्शन बताते हैं कि केवल आर्थिक विकास आम लोगों की संतुष्टि की गारंटी नहीं है। युवाओं को रोजगार, सस्ती शिक्षा, किफायती आवास और बेहतर सार्वजनिक सेवाएं चाहिए। अब सरकारों के सामने चुनौती सिर्फ प्रदर्शनों को संभालने की नहीं, बल्कि उन समस्याओं का समाधान करने की भी है, जिनसे लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकारें अपने वादों को ठोस फैसलों में बदल पाती हैं या नहीं।

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